वन भूमि खाली कराने गई प्रशासन की टीम को ग्रामीणों के विरोध पर लौटना पड़ा वापस।

 जमीन सरकार की तो साहब हम किसके?': नौगढ़ में वन भूमि खाली कराने पहुंची टीम के आगे लेटीं महिलाएं, विस्थापन की आशंका पर भड़का भरदुआ



(रिपोर्ट- मदन मोहन/नौगढ़/चंदौली) 



चंदौली। जनपद के वनांचल क्षेत्र नौगढ़ में सोमवार को उस समय भारी बवाल खड़ा हो गया, जब वन विभाग की करीब 30 बीघा सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराने पहुंची टीम को ग्रामीणों के उग्र विरोध का सामना करना पड़ा। देखते ही देखते पूरा भरदुआ गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो गया।

कार्रवाई के विरोध में 50 से अधिक महिलाएं सीधे जेसीबी (JCB) और ट्रैक्टरों के आगे लेट गईं, जबकि हाथ में लाठी-डंडे लिए करीब 300 ग्रामीण मोर्चा संभालकर खड़े हो गए। कई घंटों के हाई-वोल्टेज ड्रामे और बढ़ते तनाव को देखते हुए आखिरकार प्रशासनिक टीम को बिना कार्रवाई के ही बैरंग वापस लौटना पड़ा।

सुरक्षा खाई खोदने पहुंची थी टीम, महिलाओं ने ट्रैक्टरों पर चढ़कर रोका



जानकारी के अनुसार, जयमोहनी वन क्षेत्र के भरदुआ गांव में वन विभाग की इस जमीन पर कब्जा लेने के लिए जैसे ही प्रशासन ने ट्रैक्टरों से जुताई शुरू कराई और सुरक्षा के लिहाज से जेसीबी से ट्रेंच (खाई) खोदने की कोशिश की, वैसे ही पूरा गांव लामबंद हो गया।

महिलाओं ने बिना डरे आगे बढ़कर ट्रैक्टरों का घेराव कर लिया और कुछ महिलाएं ट्रैक्टरों के ऊपर चढ़ गईं। जैसे ही जेसीबी आगे बढ़ी, महिलाएं जमीन पर लेट गईं और अधिकारियों से तीखी बहस पर उतर आईं।

"साहब! जमीन सरकार की तो हम किसके?" — महिलाओं के तीखे सवालों से निरुत्तर हुए अधिकारी

दशकों से जिस जमीन पर ग्रामीण खेती कर रहे हैं, उसे छिनता देख महिलाओं का दर्द और आक्रोश आंसुओं के साथ बाहर निकल आया। अधिकारियों के सामने चीखते हुए महिलाओं ने सीधे दिल को झकझोर देने वाले सवाल दागे:"साहब! जब हमारी जीविका ही नहीं रहेगी, तो जान रहकर क्या करेगी? हम लोग मर जाएंगे लेकिन अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे। 50 वर्षों से अधिक समय से हम यहीं रह रहे हैं, यही हमारा सब कुछ है। यदि यह जमीन सरकार की है, तो हम किसके हैं? हमारी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?"



इन तीखे और सीधे सवालों के सामने मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारी भी कुछ पलों के लिए पूरी तरह निरुत्तर नजर आए।

 "पहले क्यों नहीं रोका?" — विजयपुर-बिजौरा विस्थापन को लेकर गहराया संदेह

ग्रामीणों ने कार्रवाई के समय पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि जब वे 50 सालों से अधिक समय से यहां खेती कर रहे हैं, तो इससे पहले कभी किसी को आपत्ति क्यों नहीं हुई? अचानक ऐसी क्या आफत आ गई कि बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के सीधे घर मकान ध्वस्त करने टीम आ पहुंची?

इसी बीच ग्रामीणों के बीच एक और गहरा संदेह चर्चा का विषय बना रहा। ग्रामीणों ने आशंका जताते हुए कहा:

कहीं यह पूरी कार्रवाई विजयपुर और बिजौरा गांव के विस्थापितों को यहां बसाने के लिए तो नहीं की जा रही है? क्या हमारे पेट पर लात मारकर दूसरों को बसाने की पृष्ठभूमि तैयार की जा रही है?"



इस विस्थापन के डर ने ग्रामीणों के गुस्से में घी का काम किया, जिसके बाद वे आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए।

चार थानों की फोर्स भी पड़ी कम, रोकना पड़ा अभियान

मामले को हाथ से निकलता देख चकिया क्षेत्राधिकारी (सीओ) के नेतृत्व में नौगढ़, चकरघट्टा, चकिया और साहबगंज थानों की भारी पुलिस फोर्स (80 से अधिक जवान) को मौके पर उतार दिया गया था। काफी समझाने-बुझाने के बाद भी जब ग्रामीण टस से मस नहीं हुए, तो माहौल बिगड़ने की आशंका को देखते हुए वन विभाग के एसडीओ (SDO) वरुण सिंह ने फिलहाल कार्रवाई को रोकने का फैसला किया।

अवैध कब्जा किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं" — प्रशासन सख्त

इस पूरे घटनाक्रम पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए  उपजिलाधिकारी नौगढ़ विनय मिश्रा ने कहा कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया नियमानुसार की जा रही है। इस बार कानून-व्यवस्था और भारी विरोध को देखते हुए टीम वापस आई है, लेकिन जल्द ही पुख्ता तैयारियों और आवश्यक बल के साथ दोबारा बड़ा अभियान चलाकर वन विभाग की इस सरकारी जमीन को पूरी तरह कब्जामुक्त कराया जाएंगे

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